अमृतसर रावड देहेन एक दुखद घड़ी।
ये बहुत ही कष्ट दायक पीड़ा है, की सब कुछ होते हुए भी ऐसी घटनाएं घटती है। इसमें आखिर गलती किसी की है, किसकी हम इसका कसूरवार ठहराए । आखिर गलती कहा हुई। क्यों इसके हम खुद जिंबेदार है। या फिर रेलवे, या केवल वो ड्राइवर या प्रशासन जिसने वहा रावण धेहेन कि अनुमति दी। या फिर इसमें भी राज नीति है, जी इस देश की दीमक की तरह खोखला कर रही है। अगर ऐसा है तो क्या शिद्धू जी की पत्नी जिंबेदर है, सुनने में आया है की वो समय से देरी से पहुंची थी अगर वो वक़्त पर पहुंचती ती सायाद ये घटना घटती।
इसका जवाब अब कों देगा । इसका जवाब है कि इसके जिंबेदार हम स्यम है। जब तक हम अपनी जिंबेदरी खुद नहीं समझेंगे तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। सबसे पहले ऐसे कार्य क्रम रेलवे से और रोड से दूर हो। इसमें नमाज़ भी आजाती है।
कहते है कि हिंदुस्तान अब आजाद है यहा पर , यहा पर सबको हक है अपना अपना करने पर। पर ये पब्लिक प्रॉपर्टी ना किसी के धरम की है और न ही किसी की अपनी।
में अमित कुमार कुशवाहा इसमें ज्यादा कुछ भी नहीं कहना चाहता । क्युकी कुछ भी कहना बेकार होगा।
#शिक्षाइंडिया लेखक #अमितकुमारकुशवाहा
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